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व्यवसाय ज्योतिष

किसी के पेशे या आय के स्रोत का निर्धारण आज के परिवेश में किसी भी ज्योतिषी के लिए बहुत कठिन काम है क्योंकि समय के साथ नौकरी या व्यवसाय के प्रकार बहुत बदल गए हैं। हालांकि ज्योतिष में व्यवसाय या नौकरी के प्रकार कुंडली के ग्रहों की स्थिति और उसके बलाबल पर निर्भर करता हैं। मजबूत ग्रह पेशे या की प्रकृति को दर्शाते है इसलिए ग्रह की प्रकृति और ग्रह के बल का ज्ञान आजीविका की प्रासंगिकता में सहायक होते है। नौकरी और व्यवसाय के बीच पेशे का चयन जीवन का बहुत महत्वपूर्ण निर्णय है।

कुंडली में कई ज्योतिषीय ग्रह योग,ग्रहों की युति और सिद्धांत हैं जो पेशे की प्रकृति का निर्धारण करते हैं।सभी सिद्धांत,ग्रह योग और विभिन्न ग्रहो की युति का वर्णन करना असंभव है, इसलिए कुछ बुनियादी ज्योतिषीय कारक जो पेशे की प्रकृति का निर्धारण करते हैं इसकी जानकारी दे रहा हूं।

लग्न कुंडली के दशम भाव,दशमेश का लग्न कुंडली में बलवान होकर अच्छी स्थिति में होना एवं दशमांश कुंडली में भी लग्न,लग्नेश का दशम भाव दशमेश की अच्छी स्थिति में होना बहुत श्रेष्ठ कैरियर का निर्माण कराती है तथा जातक को कम से कम बाधा में अच्छे कैरियर की प्राप्ति आसानी से हो जाती है।

सूर्य लग्न,चंद्र लग्न अथवा दशमेश से दसवें भाव के स्वामी जिस नवांश में स्थित हो उनके अनुसार आजीविका का निर्णय करना चाहिए|

लग्न –

लग्न का बली होना जन्मपत्रिका को सबल बनाने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है,लग्न में स्थित ग्रह अपना प्रभाव पैदा करते हैं। बच्चे के जन्म के समय लग्न में ग्रह की स्थिति उसके स्वास्थ्य, वित्त, कैरियर और भाग्य एवं उसके संपूर्ण व्यक्तित्व को प्रभावित करती है। जातक का कैरियर कितना अच्छा रहेगा इसका निर्भर लग्न में अवस्थित ग्रह एवं इसकी प्रकृति पर निर्भर करता है।

दसवां भाव/स्वामी -

दशमवाँ भाव सामाजिक स्तर,सामाजिक मान प्रतिष्ठा एवं नौकरी या व्यवसाय को दर्शाता है। 10 वाँ भाव और लग्न से इसके स्वामी की स्थिति,चंद्र लग्न एवं सूर्य लग्न से दशम भाव एवं इसकी ग्रह की स्थिति व्यवसाय की प्रकृति का निर्धारण करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। दशम भाव के स्वामी की स्थिति जितनी ज्यादा सबल होगी उतना ही व्यवसायिक उन्नति,सामाजिक मान-प्रतिष्ठा,नाम, प्रसिद्धि और आजीविका के स्रोत का अच्छा संकेत देती है। इसके अलावा यह सरकार और सत्तारूढ़ अभिजात्य वर्ग के साथ अच्छे या बुरे संबंध का भी प्रतिनिधित्व करता है।

तीसरा भाव/स्वामी -

यह भाव जातक के साहस,आत्मविश्वास और मित्र वर्ग से अच्छे या बुरे संबंध को दर्शाता है। प्रारंभिक व्यावसायिक जीवन, जीवन में लिया गया जोखिम भी तीसरे भाव और इसके स्वामी द्वारा दर्शाया जाता है।

पंचम भाव/स्वामी -

पंचम भाव और इसके स्वामी की सामर्थ्य यह निर्धारित करती है कि शिक्षा का स्तर कितना आगे जाएगा,रचनात्मक दिमाग या मस्तिष्क की क्रियाशीलता कितना बेहतर है, यह भाव अचानक लाभ का भी प्रतिनिधित्व करता है।

छठा भाव/स्वामी -

यह भाव बैंक या किसी अन्य वित्तीय संस्थानों से ऋण का संकेत देता है, व्यवसाय या नौकरी के दौरान किस तरह की बाधाएं आएंगी,जातक कितना कर्जदार होगा,विरोधी तत्व हावी होंगे या नहीं इसका निर्णय इसी भाव से किया जाता है।

सातवां भाव/स्वामी -

यह भाव पेशेवर संबंध और व्यवसायिक साझेदारी, स्वतंत्र व्यवसाय का प्रतिनिधित्व करता है। आय का दैनिक स्रोत भी इसी भाव से निर्धारित किया जाता है।

नवम भाव/स्वामी -

यह भाव भाग्य,धन के संचलन, किसी व्यक्ति की गरिमा, विदेश यात्रा और सरकारी सहायता का संकेत देता है।

एकादश भाव/स्वामी -

एकादश भाव से,किसी के जीवन में लाभ और कितना ज्यादा आय होगी इसको दर्शाता है। यह भाव लंबी यात्रा, व्यापारिक यात्रा का भी संकेत देता है।

ग्रहों का गोचर -

नौकरी या पेशे की प्रकृति भी दशा और अन्तर्दशा के ग्रह काल पर निर्भर करती है। ग्रहों की दशा और अंतर्दशा जातक को कभी-कभी बहुत ही कठोर और नाटकीय तरीके से पेशे में बदलाव के लिए मजबूर करती है। जातक के पेशे या कैरियर में सफलता ग्रहों की मजबूत या कमजोर और अनुकूल या प्रतिकूल दशा / अन्तर्दशा पर निर्भर करती है जो जन्म-पत्रिका के अलग-अलग भावो एवं राशियों में स्थित होते हैं।

दशमांश कुंडली में राशि के 10 भाग किए जाते हैं तथा प्रत्येक भाग 3 अंश के बराबर होता है,इसे ही दशमांश कहा जाता है।दशमांश कुंडली जातक के कार्य क्षेत्र के बारे में बताता है कि जातक क्या कारोबार/नौकरी या व्यवसाय करेगा इसमें कितना सफल या असफल होगा इसकी पूरी जानकारी लग्न कुंडली के साथ-साथ दशमांश कुंडली के गहन अध्ययन करने के बाद ही सही रूप से पता चलता है।

प्रत्येक राशी को 10 बराबर भागों में विभाजित किया जाता है।

यदि संकेत विषम है, तो संकेत के 10 भाग साइन से शुरू होने वाले 10 लगातार संकेतों में जाते हैं।

यदि चिह्न सम है, तो चिन्ह के 10 भाग 9 वें संकेत से शुरू होने वाले 10 लगातार संकेतों में जाते हैं।

दशमांश के द्वारा फल कथन -

दशमांश वर्ग कुंडली से आसानी से जाना जा सकता है कि जातक के व्यवसाय या नौकरी में देरी या असंतोष की स्थिति क्यों है।

दशमांश लग्न पेशे से प्रसिद्धि को दर्शाता है , लग्नेश कार्य के प्रति मानसिकता और उद्देश्य को दर्शाता है।

दशमांश एक पेशेवर क्रियाओं के साथ-साथ समाज में अन्य गतिविधियों को शौक और हितों से संबंधित दिखाता है।

राशि चार्ट में 10 वां भाव भी करियर का निर्धारण करने के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह जातक के भौतिक कर्म को दर्शाता है।

कैरियर को देखते हुए 10 वें भाव के राशि स्वामी की D10(दशमांश) में मजबूत प्लेसमेंट एक महत्वपूर्ण कारक है।

यदि दशमेश या दशम भाव में स्थित ग्रह दशमांश कुंडली में चर राशि में स्थित हो तो जातक नौकरी में आसानी से सफलता प्राप्त कर लेता है।

यदि 10 वाँ भाव का स्वामी स्वयं के राशि ,केंद्र या त्रिकोण में हो तो व्यक्ति का कैरियर अच्छा होगा।

दशमांश कुंडली के लग्न,लग्नेश और दशम भाव,भावेश का केंद्र त्रिकोण में बली होकर बैठना महत्वपूर्ण है क्योंकि लग्नेश दशम भाव दशमेश पर जिस प्रकार के विषय से संबंधित कारक ग्रहों का प्रभाव पड़ेगा उसी प्रकार के विषय-क्षेत्र में जातक का करियर बनेगा एवं सफलता का योग होगा।

इसके अलावा, हमें राशि चार्ट में मौजूद किसी भी राजयोग में शामिल ग्रहों के D10(दशमांश) में प्लेसमेंट को देखना चाहिए।

आपकी जन्म पत्रिका में कौन सा योग है नौकरी का या व्यवसाय का ?

दशम भाव बली हो तो नौकरी व सप्तम भाव बली हो तो जातक को व्यवसाय चुनना चाहिए।

यदि जन्मपत्रिका का दूसरा भाव,दशम भाव एवं एकादश भाव का संबंध छठे भाव या इसके स्वामी से हो तो यह कुंडली में नौकरी का योग बनाता है।

भारतीय ज्योतिष शास्त्रों में छठा भाव नौकरी एवं सेवा का भाव माना गया है और छठे भाव का कारक ग्रह शनि है।दशम भाव या दशमेश का संबंध छठे भाव से हो तो जातक नौकरी करता है।

लग्नेश,सप्तमेश,लाभेश,गुरु चन्द्रमा का बली होना या केंद्र-त्रिकोण में स्थित होना व्यवसाय में आशातीत सफलता दिलाता है।

सर्वाष्टक वर्ग कुंडली सिद्धांत के अनुसार,अगर सर्वाष्टक वर्ग में दशम की अपेक्षा एकादश में अधिक अंक हो एवं द्वादश में कम अंक हो और द्वादश की अपेक्षा प्रथम में अधिक अंक हो तो जातक की आमदनी/आजीविका बेहतरीन होती है।

ज्योतिष सर्वाष्टक वर्ग में जातक के छठे भाव में सर्वाधिक अंक हो तो जातक नौकरी में सफलता प्राप्त करता है या दूसरे के अधीन रहकर कार्य करता है।

यदि सर्वाष्टक वर्ग में दसवें भाव में सर्वाधिक अंक हो तो जातक का अपना खुद का निजी व्यवसाय होता है।

यदि कुंडली में द्वितीय,दशम व एकादश का संबंध सप्तम भाव से हो तो जातक व्यापार में सफलता प्राप्त आसानी से कर लेता है।


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Harshraj Solanki

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